Sunday, June 7, 2026
spot_img
Homeव्यापारमध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी के मिल रहे टोकन: किसानों के लिए राहत...

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी के मिल रहे टोकन: किसानों के लिए राहत या नई परेशानी?

हर साल रबी सीजन में किसानों को सबसे ज़्यादा उम्मीद रहती है कि उनकी गेहूं की फसल सरकारी समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाएगी। मध्यप्रदेश, जो देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है, में इस साल गेहूं की खरीदी प्रक्रिया को लेकर कई बदलाव हुए हैं। सरकार द्वारा ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू किए जाने के बाद किसानों को टोकन मिलने शुरू हो गए हैं, लेकिन इसके साथ कुछ समस्याएं और सवाल भी उठ खड़े हुए हैं।

गेहूं खरीदी के लिए टोकन प्रणाली क्या है?

सरकार ने गेहूं की खरीदी को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए टोकन प्रणाली शुरू की है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत:

  • किसान ई-उपार्जन पोर्टल या लोक सेवा केंद्र के माध्यम से पंजीकरण कराते हैं।
  • पंजीकरण के बाद उन्हें एक टोकन (Token) जारी किया जाता है जिसमें गेहूं बेचने की तारीख, मंडी/क्रय केंद्र और समय का उल्लेख होता है।
  • बिना टोकन के किसी भी किसान को गेहूं बेचने की अनुमति नहीं है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना, फसल का समय पर उठाव सुनिश्चित करना और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है।

टोकन मिलने की प्रक्रिया

इस वर्ष 2025 की खरीदी प्रक्रिया में किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से टोकन जारी किए जा रहे हैं। कई जिलों में किसानों को अप्रैल के अंतिम सप्ताह से लेकर मई की शुरुआत तक के टोकन जारी हो चुके हैं। यह टोकन SMS, पोर्टल या लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रमुख बातें:

  • इस बार गेहूं खरीदी 15 मार्च से शुरू हुई और इसे 31 मई 2025 तक चलाने की योजना है।
  • खरीदी 2100 रुपए प्रति क्विंटल (समर्थन मूल्य) पर की जा रही है।
  • किसानों को पहले पंजीकरण और फिर टोकन जारी होने की तिथि पर फसल बेचने का अवसर मिलेगा।

किसानों को मिल रही राहत

कुछ जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, सीहोर, और विदिशा के किसानों ने बताया कि इस बार टोकन प्रणाली थोड़ी बेहतर है क्योंकि:

  • उन्हें पहले से ही दिन और समय पता होता है, जिससे उन्हें मंडियों में लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
  • फसल की तौल और भुगतान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी है।
  • SMS और ऑनलाइन अपडेट्स के माध्यम से जानकारी मिल रही है।

किसानों की समस्याएं भी कम नहीं

हालांकि, इस प्रणाली के साथ कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं:

1. टोकन मिलने में देरी

कई किसानों को पंजीकरण के हफ्तों बाद भी टोकन नहीं मिला, जिससे उन्हें चिंता है कि कहीं खरीदी का समय निकल न जाए।

2. तकनीकी समस्याएं

ई-उपार्जन पोर्टल पर बार-बार लोड अधिक होने से साइट क्रैश हो रही है, जिससे किसान बार-बार प्रयास करने के बाद भी टोकन डाउनलोड नहीं कर पा रहे।

3. लोक सेवा केंद्रों पर भीड़

डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण अधिकतर किसान CSC (लोक सेवा केंद्र) पर निर्भर हैं, जहां लंबी लाइनें और समय की बर्बादी होती है।

4. मौसम की मार और टोकन की तारीख

कई किसानों की फसल पहले ही तैयार हो चुकी है, लेकिन उन्हें मई के अंत की तारीख के टोकन मिले हैं। ऐसे में फसल को लंबे समय तक स्टोर करना भारी पड़ रहा है – खासकर बारिश की आशंका के बीच।

सरकार की ओर से प्रयास

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत कदम उठाए हैं:

  • जिन किसानों को टोकन नहीं मिला है, उनके लिए “प्रतीक्षा सूची” तैयार की जा रही है।
  • कुछ जिलों में अतिरिक्त क्रय केंद्र खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
  • 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं जहाँ किसान अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं।
  • टोकन वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तकनीकी टीमों को सक्रिय किया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना

विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि:

  • यह पूरी प्रक्रिया “कागज़ी सुधार” बनकर रह गई है।
  • किसानों की तकनीकी सहायता के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
  • खरीदी केंद्रों पर अब भी भ्रष्टाचार और दलाली कायम है।

वहीं, सरकार का कहना है कि यह टोकन प्रणाली किसानों को “सम्मानपूर्वक और व्यवस्थित” रूप से गेहूं बेचने का मौका देती है और आने वाले समय में इससे किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

भविष्य की संभावनाएं

अगर टोकन वितरण और खरीदी प्रक्रिया में और सुधार लाया जाए, तो यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि:

  • तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
  • ग्राम स्तर पर हेल्प डेस्क और जागरूकता शिविर लगाए जाएं।
  • फसल की गुणवत्ता की जांच और तौल में पारदर्शिता रखी जाए।
  • भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए टोकन प्रणाली का उद्देश्य किसानों को सहूलियत देना है, लेकिन इसका क्रियान्वयन कुछ स्थानों पर अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। यह प्रणाली तभी सफल मानी जाएगी जब हर किसान समय पर अपना गेहूं बेच सके, बिना किसी तकलीफ के।

सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टोकन वितरण में पारदर्शिता बनी रहे, तकनीकी समस्याओं का समाधान शीघ्र हो, और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ बिना देरी के प्राप्त हो।

To read daily updates: https://agnews.in/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments